किस्सा-कहानी
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शुक्रवार, 17 अप्रैल 2009
तमन्ना..
हर तमन्ना
यहां पूरी नहीं होती,
ख्वाब जो देखा
उसकी तावीर नहीं होती।
करना है तसल्ली ,
बस इस ख़याल से;
खुदा होता है मगर उसकी
दीदारे-राह नहीं होती।
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